मानसिकता गुलामी की
राम राम दोस्तों !! आजादी के इतने दिनों बाद ( लगभग 7 दशक ) बाद भी हमें मानसिक गुलामी में जीने की आदत पड़ी हुई है ,हम आज भी भीड़ तंत्र का वो हिस्सा मात्र है जिसका शारीरिक संरचना तो बिशाल है पर मानसिक संरचना संकीर्ण और विषैली ! एक दुसरे के पीछे एक पंक्ति में रहने से आपको आगे कुछ दिखाई नहीं पड़ेगा ,एक दूसरे के साथ अगल - बगल खरे होने की आदत डालिये दोस्तों !! जय भारत जय जनता !!
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